नया टैक्स स्लैब बनाम पुराना टैक्स स्लैब: क्या है आपके लिए सबसे अच्छा?
क्या आप टैक्स प्लानिंग के बारे में सोच रहे हैं? नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब के बीच चुनना एक बड़ा फैसला है।
दोनों स्लैब के बारे में जानना जरूरी है। यह आपको यह तय करने में मदद करेगा कि कौन सा आपके लिए बेहतर है।

नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब के बीच का अंतर जानना आपके वित्त को सुधारने में मदद कर सकता है।
मुख्य बिंदु
- नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब के बीच मुख्य अंतर
- आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प कैसे चुनें
- टैक्स प्लानिंग के लिए महत्वपूर्ण बातें
- नए कर नियमों का प्रभाव
- वित्तीय निर्णय लेने में मदद
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भारत में टैक्स स्लैब का परिचय
भारत में टैक्स स्लैब को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आपको अपनी आय को अच्छी तरह से प्रबंधित करने में मदद करता है। इससे आपके कर को कम करने में भी मदद मिलती है।
भारत में आयकर प्रणाली में टैक्स स्लैब का बहुत बड़ा योगदान है। टैक्स स्लैब विभिन्न आय वर्गों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित करते हैं। इन दरों के आधार पर आपका कर निर्धारित होता है।
टैक्स स्लैब क्या होता है?
टैक्स स्लैब आयकर अधिनियम के तहत आय के आधार पर निर्धारित दरें होती हैं। ये दरें आपकी आय के अनुसार आपके कर को निर्धारित करती हैं।
भारत में टैक्स स्लैब का इतिहास
भारत में टैक्स स्लैब का इतिहास 1961 के आयकर अधिनियम से शुरू होता है। विभिन्न सरकारों ने आर्थिक परिस्थितियों और नीतियों के अनुसार टैक्स स्लैब में बदलाव किए हैं।
इन बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल और न्यायसंगत बनाना है। सरकार ने विभिन्न आय वर्गों को राहत देने के लिए टैक्स स्लैब में बदलाव किए हैं।
वर्तमान टैक्स व्यवस्था का अवलोकन
भारत में दो प्रकार की टैक्स व्यवस्था है: पुराना टैक्स स्लैब और नया टैक्स स्लैब। दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। आपकी वित्तीय स्थिति के अनुसार सही चुनाव करना महत्वपूर्ण है।
आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों और परिस्थितियों के अनुसार सही टैक्स स्लैब चुनना चाहिए। वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना या स्वयं जानकारी प्राप्त करना उचित है।
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पुराना टैक्स स्लैब: विस्तृत जानकारी
पुराना टैक्स स्लैब उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो निवेश और खर्चों पर छूट चाहते हैं। यह स्लैब आयकर अधिनियम के तहत कई छूट देता है। इससे आपकी कर योग्य आय कम हो सकती है।
पुराने टैक्स स्लैब की दरें और आय सीमाएं
पुराने टैक्स स्लैब में, आय के आधार पर टैक्स लगाया जाता है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं:
- 0 से 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं।
- 2.5 लाख से 5 लाख रुपये तक की आय पर 5% टैक्स।
- 5 लाख से 7.5 लाख रुपये तक की आय पर 10% टैक्स।
- 7.5 लाख से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15% टैक्स।
- 10 लाख से 12.5 लाख रुपये तक की आय पर 20% टैक्स।
- 12.5 लाख से 15 लाख रुपये तक की आय पर 25% टैक्स।
- 15 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30% टैक्स।

पुराने टैक्स स्लैब में उपलब्ध छूट और कटौतियां
पुराने टैक्स स्लैब में कई छूट और कटौतियां हैं। इनमें शामिल हैं:
- धारा 80C के तहत निवेश पर कटौती, जैसे PPF, NSC, और जीवन बीमा प्रीमियम।
- धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कटौती।
- धारा 24B के तहत घर ऋण के ब्याज पर कटौती।
- शिक्षा ऋण के ब्याज पर कटौती।
पुराने टैक्स स्लैब के तहत टैक्स की गणना
पुराने टैक्स स्लैब के तहत, सबसे पहले अपनी कुल आय की गणना करें। फिर, उपलब्ध कटौतियों और छूटों का लाभ उठाकर कर योग्य आय कम करें। अंत में, कर योग्य आय पर लागू टैक्स दरों के अनुसार टैक्स की गणना करें।
आपको अपने कर सलाहकार से परामर्श लेना चाहिए। इससे आपको अपनी विशिष्ट स्थिति के अनुसार सर्वोत्तम निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
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नया टैक्स स्लैब: विस्तृत विश्लेषण
नया टैक्स स्लैब उन लोगों के लिए एक विकल्प है जो अपने कर को आसान बनाना चाहते हैं। यह आयकर अधिनियम में एक बड़ा बदलाव है। यह करदाताओं को अपनी आय और कर की गणना करने का एक सरल तरीका देता है।
नए टैक्स स्लैब की दरें और आय सीमाएं
नया टैक्स स्लैब विभिन्न आय सीमाओं के लिए अलग-अलग दरों पर लागू होता है। यहाँ एक विवरण है:
| आय सीमा | कर दर |
|---|---|
| 0 – 3 लाख | 0% |
| 3 – 6 लाख | 5% |
| 6 – 9 लाख | 10% |
| 9 – 12 लाख | 15% |
| 12 – 15 लाख | 20% |
| 15 लाख से अधिक | 30% |
नए टैक्स स्लैब में छूट और कटौतियों की स्थिति
नए टैक्स स्लैब में, अधिकांश कर छूट और कटौतियाँ नहीं ली जा सकती हैं। इसका मतलब है कि करदाताओं को अधिक कर देना पड़ सकता है।

नए टैक्स स्लैब के तहत टैक्स की गणना
नए टैक्स स्लैब के तहत, कर की गणना सरल है। यहाँ एक उदाहरण है:
- आय: 10 लाख रुपये
- कर दर: 15% (9 – 12 लाख के बीच की आय पर)
- कर देयता: 10 लाख का 15% = 1.5 लाख रुपये
यह ध्यान रखें कि नए टैक्स स्लैब में कर की गणना करते समय कोई मानक कटौती नहीं है।
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नया टैक्स स्लैब बनाम पुराना टैक्स स्लैब: तुलनात्मक विश्लेषण
अब नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब की तुलना करना बहुत जरूरी हो गया है। यह आपकी आय और बचत पर सीधा प्रभाव डालता है। आयकर व्यवस्था में हाल ही में हुए बदलाव ने लोगों को अपने टैक्स स्लैब का चयन करने के लिए मजबूर किया है।
टैक्स दरों में अंतर
नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब के बीच एक बड़ा अंतर टैक्स दरें हैं। नए टैक्स स्लैब में कम टैक्स दरें हैं, लेकिन आपको कुछ छूटें छोड़नी होंगी।
पुराने टैक्स स्लैब में अधिक टैक्स दरें हैं, लेकिन आप विभिन्न छूटों और कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं। आइए एक उदाहरण के माध्यम से इसे समझते हैं:
- नया टैक्स स्लैब: 7 लाख तक की आय पर शून्य टैक्स, 7-9 लाख के बीच 10% टैक्स, 9-12 लाख के बीच 15% टैक्स, 12-15 लाख के बीच 20% टैक्स।
- पुराना टैक्स स्लैब: 2.5 लाख तक की आय पर शून्य टैक्स, 2.5-5 लाख के बीच 5% टैक्स, 5-7.5 लाख के बीच 10% टैक्स, 7.5-10 लाख के बीच 15% टैक्स, 10-12.5 लाख के बीच 20% टैक्स।
छूट और कटौतियों का प्रभाव
नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब के बीच एक बड़ा अंतर छूट और कटौतियों का प्रभाव है। पुराने टैक्स स्लैब में आप विभिन्न प्रकार की छूटों और कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं, जैसे कि सेक्शन 80C के तहत निवेश पर कटौती।
नए टैक्स स्लैब में ये छूटें और कटौतियां उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए आपको अपनी आय और व्यय के अनुसार निर्णय लेना होगा।

विभिन्न आय वर्गों पर प्रभाव
नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब का प्रभाव विभिन्न आय वर्गों पर अलग-अलग होता है। कम आय वाले लोगों के लिए नया टैक्स स्लैब अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें कम टैक्स दरें हैं।
उच्च आय वाले लोगों के लिए पुराना टैक्स स्लैब अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें अधिक छूटें और कटौतियां उपलब्ध हैं।
आपको अपनी आय और व्यय के अनुसार निर्णय लेना होगा कि कौन सा टैक्स स्लैब आपके लिए सबसे अच्छा होगा।
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दोनों टैक्स स्लैब के फायदे और नुकसान
दोनों टैक्स स्लैब के अपने फायदे और नुकसान हैं। इन्हें समझकर आप अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निर्णय ले सकते हैं। आइए दोनों टैक्स स्लैब के फायदे और नुकसान पर एक नज़र डालें।
पुराने टैक्स स्लैब के फायदे
पुराने टैक्स स्लैब में कई कटौतियों और छूटों का लाभ है। इससे आपकी कर योग्य आय कम हो सकती है।
- कटौतियों का लाभ: धारा 80C, 80D आदि के तहत कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं।
- निवेश प्रोत्साहन: विभिन्न निवेश विकल्पों में निवेश करके आप टैक्स बचा सकते हैं।
- व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार: आप अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं।
पुराने टैक्स स्लैब के नुकसान
पुराने टैक्स स्लैब में अधिक जटिलताएं और कागजी कार्रवाई हो सकती है। इससे समय और प्रयास की अधिक आवश्यकता होती है।
- जटिलता: अधिक कागजी कार्रवाई और जटिलताएं शामिल हो सकती हैं।
- अधिक समय की आवश्यकता: टैक्स रिटर्न दाखिल करने में अधिक समय लग सकता है।
नए टैक्स स्लैब के फायदे
नया टैक्स स्लैब सरल और सीधा है। इसमें कम टैक्स दरें हैं और कई कटौतियों की आवश्यकता नहीं होती।
- सरलता: नया टैक्स स्लैब सरल और समझने में आसान है।
- कम टैक्स दरें: कई आय वर्गों के लिए कम टैक्स दरें प्रदान करता है।
- कम कागजी कार्रवाई: इसमें कई कटौतियों और छूटों की आवश्यकता नहीं होती।
नए टैक्स स्लैब के नुकसान
नए टैक्स स्लैब में कटौतियों और छूटों का लाभ नहीं है। इससे कुछ व्यक्तियों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है।
- कटौतियों का अभाव: धारा 80C आदि के तहत कटौतियों का लाभ नहीं मिलता।
- निवेश में कमी: टैक्स बचत के लिए निवेश करने की प्रेरणा कम हो सकती है।
| विशेषताएं | पुराना टैक्स स्लैब | नया टैक्स स्लैब |
|---|---|---|
| टैक्स दरें | उच्च | कम |
| कटौतियां | उपलब्ध | उपलब्ध नहीं |
| जटिलता | अधिक जटिल | सरल |
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आपके लिए कौन सा टैक्स स्लैब है बेहतर?
आपके लिए सही टैक्स स्लैब चुनने के लिए, आपको अपनी आय और व्यय का विश्लेषण करना होगा। यह निर्णय आपकी आर्थिक स्थिति और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सुझाव
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए, पुराना टैक्स स्लैब फायदेमंद हो सकता है। वे विभिन्न कटौतियों और छूटों का लाभ उठा सकते हैं। Section 80C के तहत निवेश करके और HRA छूट का लाभ उठाकर वे अपनी कर देनदारी कम कर सकते हैं।
यदि आपकी आय अधिक है और आप कटौतियों का अधिक लाभ नहीं उठा रहे हैं, तो नया टैक्स स्लैब अधिक उपयुक्त हो सकता है।
व्यापारियों और पेशेवरों के लिए सुझाव
व्यापारियों और पेशेवरों के लिए, नया टैक्स स्लैब आकर्षक हो सकता है। इसमें कम टैक्स दरें हैं। लेकिन, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपनी व्यावसायिक आय सही तरीके से घोषित कर रहे हैं।
पुराने टैक्स स्लैब में, वे विभिन्न व्यावसायिक खर्चों और निवेशों पर कटौती का लाभ उठा सकते हैं। इससे उनकी कर देनदारी कम हो सकती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुझाव
वरिष्ठ नागरिकों के लिए, पुराना टैक्स स्लैब अक्सर अधिक फायदेमंद होता है। इसमें अधिक कटौतियों और छूटों की अनुमति होती है। मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और अन्य स्वास्थ्य संबंधी खर्चों पर कटौती का लाभ उठाकर वे अपनी कर देनदारी कम कर सकते हैं।
सही टैक्स स्लैब चुनने के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- अपनी आय और व्यय का विश्लेषण करें।
- विभिन्न कटौतियों और छूटों का लाभ उठाने की क्षमता का मूल्यांकन करें।
- नया टैक्स स्लैब चुनने से पहले अपनी कर देनदारी की गणना करें।
- पुराने और नए टैक्स स्लैब के बीच तुलना करें और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लें।
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प्रभावी टैक्स प्लानिंग रणनीतियाँ
प्रभावी टैक्स प्लानिंग रणनीतियों को समझने से आप अपने टैक्स बोझ को कम कर सकते हैं। यह आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है।
पुराने टैक्स स्लैब में टैक्स बचत के तरीके
पुराने टैक्स स्लैब में टैक्स बचत करने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ प्रमुख तरीके हैं:
- Section 80C के तहत निवेश करना
- स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का भुगतान करना
- शिक्षा ऋण चुकाना
इन तरीकों का उपयोग करके, आप अपनी आय को कम कर सकते हैं और टैक्स की बचत कर सकते हैं।
नए टैक्स स्लैब में टैक्स बचत के तरीके
नए टैक्स स्लैब में भी टैक्स बचत के अवसर हैं। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:
- निवेश विकल्पों का मूल्यांकन करना
- अपनी आय को विभिन्न साधनों में विभाजित करना
- टैक्स-फ्री निवेश का उपयोग करना
इन रणनीतियों को अपनाकर, आप अपने टैक्स बोझ को कम कर सकते हैं।
दोनों टैक्स स्लैब के बीच स्विच करने की रणनीति
कभी-कभी, दोनों टैक्स स्लैब के बीच स्विच करना फायदेमंद हो सकता है। यहाँ कुछ बातें हैं जिन पर विचार करना चाहिए:
| कारक | पुराना टैक्स स्लैब | नया टैक्स स्लैब |
|---|---|---|
| टैक्स दरें | उच्च | कम |
| कटौतियाँ | अधिक उपलब्ध | सीमित |
| छूट | अधिक विकल्प | कम विकल्प |
इन कारकों का विश्लेषण करके, आप अपने लिए सबसे अच्छा टैक्स स्लैब चुन सकते हैं।

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टैक्स स्लैब चुनाव के प्रभावशाली उदाहरण
टैक्स स्लैब चुनाव के प्रभाव को समझने के लिए, आइए कुछ वास्तविक उदाहरणों पर नज़र डालें। यहाँ कुछ केस स्टडीज़ हैं जो विभिन्न आय वर्गों के लिए टैक्स स्लैब चुनाव के प्रभाव को दर्शाते हैं।
केस स्टडी1: 8 लाख वार्षिक आय वाले वेतनभोगी कर्मचारी
मान लीजिए कि आपकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये है और आप वेतनभोगी कर्मचारी हैं। आइए देखें कि नया टैक्स स्लैब बनाम पुराना टैक्स स्लैब आपके लिए कौन सा बेहतर है।
| विवरण | पुराना टैक्स स्लैब | नया टैक्स स्लैब |
|---|---|---|
| वार्षिक आय | 8,00,000 | 8,00,000 |
| कटौतियाँ | 1,50,000 | 0 |
| कर योग्य आय | 6,50,000 | 8,00,000 |
| टैक्स | 68,500 | 78,000 |
इस उदाहरण में, पुराना टैक्स स्लैब आपके लिए बेहतर है क्योंकि इसमें आपको अधिक कटौतियों का लाभ मिलता है।
केस स्टडी2: 12 लाख वार्षिक आय वाले स्वरोजगार पेशेवर
अब, मान लीजिए कि आपकी वार्षिक आय 12 लाख रुपये है और आप स्वरोजगार पेशेवर हैं। आइए देखें कि नया टैक्स स्लैब बनाम पुराना टैक्स स्लैब आपके लिए कौन सा बेहतर है।
| विवरण | पुराना टैक्स स्लैब | नया टैक्स स्लैब |
|---|---|---|
| वार्षिक आय | 12,00,000 | 12,00,000 |
| कटौतियाँ | 1,50,000 | 0 |
| कर योग्य आय | 10,50,000 | 12,00,000 |
| टैक्स | 1,22,500 | 1,24,000 |
इस उदाहरण में भी, पुराना टैक्स स्लैब थोड़ा बेहतर है, लेकिन अंतर बहुत कम है।
केस स्टडी3: 15 लाख वार्षिक आय वाले निवेशक
मान लीजिए कि आपकी वार्षिक आय 15 लाख रुपये है और आप एक निवेशक हैं। आइए देखें कि नया टैक्स स्लैब बनाम पुराना टैक्स स्लैब आपके लिए कौन सा बेहतर है।
| विवरण | पुराना टैक्स स्लैब | नया टैक्स स्लैब |
|---|---|---|
| वार्षिक आय | 15,00,000 | 15,00,000 |
| कटौतियाँ | 1,50,000 | 0 |
| कर योग्य आय | 13,50,000 | 15,00,000 |
| टैक्स | 1,67,500 | 1,74,000 |
इस उदाहरण में, नया टैक्स स्लैब थोड़ा अधिक महंगा पड़ता है, इसलिए पुराना टैक्स स्लैब बेहतर है।
केस स्टडी4: 7 लाख वार्षिक आय वाले वरिष्ठ नागरिक
अब, मान लीजिए कि आपकी वार्षिक आय 7 लाख रुपये है और आप वरिष्ठ नागरिक हैं। आइए देखें कि नया टैक्स स्लैब बनाम पुराना टैक्स स्लैब आपके लिए कौन सा बेहतर है।
| विवरण | पुराना टैक्स स्लैब | नया टैक्स स्लैब |
|---|---|---|
| वार्षिक आय | 7,00,000 | 7,00,000 |
| कटौतियाँ | 1,50,000 | 0 |
| कर योग्य आय | 5,50,000 | 7,00,000 |
| टैक्स | 42,500 | 62,000 |
इस उदाहरण में भी, पुराना टैक्स स्लैब आपके लिए बेहतर है क्योंकि इसमें आपको अधिक बचत होती है।
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निष्कर्ष
नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब चुनना आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। हमने आपको इनकम टैक्स स्लैब के बारे में जानकारी दी।
टैक्स स्लैब क्या है और नए कर नियम आपकी आय कैसे प्रभावित करते हैं, यह जानना जरूरी है। आप अपनी जरूरतों और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार सही टैक्स स्लैब चुन सकते हैं।
अगर आप अपने टैक्स प्लानिंग को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स पर हमें फॉलो करें। saanvi.wealthcarez@Instagram, saanvi.wealthcarez@youtube, saanviwealthcarez@Facebook पर जाएं। यहाँ नवीनतम टैक्स अपडेट और वित्तीय सलाह मिलेगी।
FAQ
नया टैक्स स्लैब और पुराना टैक्स स्लैब में क्या अंतर है?
भारत में दोनों टैक्स स्लैब आयकर अधिनियम के तहत आते हैं। लेकिन, टैक्स दरें, आय सीमाएं, और छूट/कटौतियों के नियम अलग-अलग हैं।
मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे लिए कौन सा टैक्स स्लैब बेहतर है?
आपको अपनी आय, व्यय, और निवेश की स्थिति को देखना होगा। आप दोनों स्लैबों में टैक्स बचत के अवसरों का मूल्यांकन करें।
नए टैक्स स्लैब में कौन सी छूट और कटौतियां उपलब्ध नहीं हैं?
नए स्लैब में कई छूट और कटौतियां नहीं हैं जो पुराने में थीं। इसमें सेक्शन 80C के तहत कटौतियां और होम लोन पर ब्याज की कटौती शामिल हैं।
क्या मैं दोनों टैक्स स्लैब के बीच स्विच कर सकता हूं?
हां, आप हर साल अपने आयकर रिटर्न में स्विच कर सकते हैं। लेकिन, एक बार चुनाव करने के बाद, उसी स्लैब में रहना होगा।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए कौन सा टैक्स स्लैब बेहतर है?
वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स स्लैब आय और निवेश पर निर्भर करता है। आम तौर पर, पुराना टैक्स स्लैब बेहतर हो सकता है क्योंकि इसमें अधिक छूट हैं।
क्या टैक्स स्लैब चुनाव से मेरी आयकर देयता पर प्रभाव पड़ता है?
हां, टैक्स स्लैब चुनाव से आपकी आयकर देयता पर प्रभाव पड़ सकता है। नए स्लैब में कम टैक्स दरें हो सकती हैं, लेकिन कम छूट।
मैं अपने टैक्स स्लैब के बारे में अधिक जानकारी कहां से प्राप्त कर सकता हूं?
आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कर सलाहकार से परामर्श करके जानकारी प्राप्त करें।